भारत–चीन संबंध 2025: तनाव से सहयोग तक | व्यापार, सीमा समझौता और भविष्य की राह

TIANJIN, CHINA - SEPTEMBER 01: (----EDITORIAL USE ONLY - MANDATORY CREDIT - INDIAN PRESS INFORMATION BUREAU (PIB) / HANDOUT' - NO MARKETING NO ADVERTISING CAMPAIGNS - DISTRIBUTED AS A SERVICE TO CLIENTS----) Russian President Vladimir Putin, Chinese President Xi Jinping and India's Prime Minister Narendra Modi attend family photosShanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit 2025 in Tianjin, China on September 01, 2025. (Photo by Press Information Bureau (PIB)/Anadolu via Getty Images)

भारत–चीन संबंध 2025: तनाव-शांत, आशाओं की नई राह

जानिए कैसे 2025 में भारत और चीन के रिश्ते सीमा विवाद से आगे बढ़कर व्यापार, यात्रा और कूटनीति में नए अवसर पैदा कर रहे हैं। SCO शिखर सम्मेलन से लेकर प्रत्यक्ष उड़ानों तक — पूरी जानकारी पढ़ें।

भारत और चीन के बीच हालिया वर्षों की तनावपूर्ण स्थिति के बाद अब एक परिवर्तनकारी दौर की शुरुआत हो रही है। सीमा तनाव, व्यापार असंतुलन और वैश्विक भू-राजनीति पृष्ठभूमि में, दोनों देशों ने 2025 में सौहार्दपूर्ण प्रयासों की श्रृंखला शुरू की है। आइए जानें कि हाल के ढील-छांट और उच्च स्तरीय बैठकें इन जटिल रिश्तों में कैसे बदलाव ला रही हैं।

भारत–चीन संबंधों का ऐतिहासिक परिदृश्य

भारत और चीन के बीच संबंध प्राचीन काल से हैं। सिल्क रोड और बौद्ध धर्म के माध्यम से दोनों देशों ने आपसी सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान किया। आधुनिक समय में, 1950-60 के दशक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग था, लेकिन 1962 का युद्ध और सीमा विवादों ने रिश्तों को तनावपूर्ण बना दिया।

1990 और 2000 के दशक में व्यापार और निवेश के क्षेत्र में रिश्तों में सुधार हुआ। हालाँकि, 2020 के दशक की शुरुआत में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव के कारण रिश्तों में फिर से जटिलता आई।

2025 में सीमा समझौते की स्थिति

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In this pool photograph distributed by the Russian state agency Sputnik, Russia’s President Vladimir Putin (front L) speaks with India’s Prime Minister Narendra Modi (C) and China’s President Xi Jinping during the Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit in Tianjin on September 1, 2025. (Photo by Alexander KAZAKOV / POOL / AFP) (Photo by ALEXANDER KAZAKOV/POOL/AFP via Getty Images)

2025 में भारत और चीन ने दोनों पक्षों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

  • लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर डि-एस्केलेशन: दोनों देशों ने अपने सैनिकों की तैनाती और निगरानी को नियंत्रित करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक चैनलों का उपयोग किया।
  • संयुक्त सैन्य अभ्यास और विश्वास बढ़ाने वाले उपाय: सीमा पर किसी अप्रत्याशित टकराव को रोकने के लिए नए प्रोटोकॉल बनाए गए हैं।
  • डिप्लोमैटिक संवाद: उच्चस्तरीय वार्ता और शिखर बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं।

इन कदमों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश अब केवल विवाद को बढ़ाने के बजाय संवाद और समाधान की दिशा में ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

1. एससीओ शिखर सम्मेलन: ‘जहां संघर्ष नहीं, साझेदारी हो’ का संदेश

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी ने एक बार फिर कहा कि “ड्रैगन और हाथी साथ होंगे, नहीं कि प्रतिद्वन्द्वी।” उन्होंने सीमा पर शांति, व्यापार विस्तार और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया। इस बैठक ने एक सकारात्मक संदेश भेजा कि दोनों देश “सहयोगी, नहीं विरोधी” नजर आएंगे।

2. मॉडरन डिप्लोमेसी: कैई ची से मुलाकात का महत्व

भारत–चीन संबंध 2025
In this pool photograph distributed by the Russian state agency Sputnik, Russia’s President Vladimir Putin (L) speaks with Indian Prime Minister Narendra Modi during the Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit in Tianjin on September 1, 2025. (Photo by Alexander KAZAKOV / POOL / AFP) (Photo by ALEXANDER KAZAKOV/POOL/AFP via Getty Images)

मोदी और शी की बातचीत से ठीक पहले, कैई ची — जो शी का बेहद विश्वस्त है — ने मोदी से मुलाकात की, जो संबंधों में बदलाव के लिए रणनीतिक संकेत है। यह इंगित करता है कि बातचीत केवल औपचारिक नहीं, बल्कि गहराई से नीति निर्माण पर आधारित है।

3. प्रत्यक्ष उड़ानें, याक-धार्मिक यात्रा और डेटा सहयोग

विदेश मंत्रालय, रक्षा और अन्य विभागों के बीच कई समकलन हुए हैं:

  • सीधी फ़्लाइटों को पुनः शुरू करने पर सहमति।
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से आरंभ।
  • राजनीतिक यात्राओं, वीज़ा नीतियों और हाइड्रोलॉजिकल डेटा आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी है।

4. सीमा-पुलिसिंग समझौता: शांत माहौल का आधार

2024 में दोनों देशों ने सीमा पर गश्त और संकट प्रबंधन के लिए Border Patrol Agreement पर हस्ताक्षर किए, जिससे LAC के तनावपूर्ण क्षेत्र नजरअंदाज़ होते हुए सामान्य स्थिति में लौट रहे हैं।

5. व्यापारी और आर्थिक मुहब्बत: एक स्थिर नई सुबह

HANGZHOU, CHINA – SEPTEMBER 04: Chinese President Xi Jinping (right) shakes hands with Indian Prime Minister Narendra Modi to the G20 Summit on September 4, 2016 in Hangzhou, China. World leaders are gathering in Hangzhou for the 11th G20 Leaders Summit from September 4 to 5. (Photo by Lintao Zhang/Getty Images)
  • चीन ने महत्वपूर्ण संसाधन जैसे rare-earth minerals, fertilizers और tunnel-boiling मशीनें भारत को सप्लाय करने पर सहमति जताई है।
  • U.S. द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ और व्यापार दबाव ने भारत–चीन को आर्थिक साझेदारी की दिशा में और सक्रिय किया है।

6. घरेलू चिंताएँ और सुरक्षा चेतावनी

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जिक्र किया है कि चीन पर निरंतर निर्भरता से घरेलू उद्योगों को नुकसान होगा, जिससे बेरोज़गारी और मौद्रिक असंतुलन हो सकता है।

7. भारत की रणनीतिक संतुलन नीति

  • विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ किया कि भारत–चीन संबंध अमेरिकी संबंधों पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे स्वायत्तता और राष्ट्रीय हित से परिभाषित किया जाना चाहिए।
  • भारत ने मल्टीपोलर वर्ल्ड और शाखा-सहयोग (Quad, SCO, BRICS) जैसे मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लिया है।

 8.व्यापार और आर्थिक सहयोग

भारत–चीन संबंध 2025
Narendra Modi, India’s prime minister, right, and Xi Jinping, China’s president, wave as they arrive for delegation talks at Hyderabad House in New Delhi, India, on Thursday, Sept. 18, 2014. The worlds two most populous countries are looking to bolster economic ties and resolve a long-running border dispute during Xis trip, which began yesterday in Modis home state of Gujarat. Photographer Graham Crouch/Bloomberg via Getty Images

भारत–चीन व्यापार संबंध अब भी मजबूत हैं, लेकिन 2025 में दोनों देशों ने संतुलित और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की दिशा में प्रयास बढ़ा दिए हैं।

  • दोतरफा व्यापार में वृद्धि: तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और रीयल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है।
  • इनोवेशन और स्टार्टअप सहयोग: भारतीय स्टार्टअप और चीनी टेक कंपनियों के बीच साझेदारी के नए अवसर उभरे हैं।
  • सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन: भारत ने अपने आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करते हुए चीन पर पूरी तरह निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया।

व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ भारी निवेश और तकनीकी साझेदारी दोनों देशों को लाभ पहुंचा रहे हैं।

9.वैश्विक मंच पर रणनीतिक संतुलन

In this pool photograph distributed by the Russian state agency Sputnik, Russia’s President Vladimir Putin and Indian Prime Minister Narendra Modi hold a meeting on the sidelines of the Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit in Tianjin on September 1, 2025. (Photo by Vladimir SMIRNOV / POOL / AFP) (Photo by VLADIMIR SMIRNOV/POOL/AFP via Getty Images)

2025 में भारत और चीन की भूमिका केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं है। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में दोनों देशों की अहम भूमिका है।

  • BRICS और SCO में सक्रियता: दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाया है।
  • जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा: हरित ऊर्जा और जलवायु नीतियों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति: WTO और अन्य वैश्विक संगठनों में भारत और चीन ने व्यापार और निवेश नियमों पर सहमति बनाने का प्रयास किया।

इन प्रयासों से यह संकेत मिलता है कि भारत–चीन संबंध केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर संतुलन और सहयोग का माध्यम बन रहे हैं।

10.हीन-भविष्य का खाका: आगे क्या?

क्षेत्र

भविष्य की संभावनाएँ

उड़ान और यात्रा सीमापार व्यक्तिगत और धार्मिक जुड़ाव फिर से सक्रिय हो सकता है।
व्यापार और इनवेस्टमेंट व्यापार वृद्धि और निवेश दोनों के अवसर मिलेंगे, लेकिन संतुलन जरूरी होगा।
सीमा प्रबंधन स्थायी शांति के लिए नए समझौते और संघर्ष समाधान की रणनीति बनेगी।
रणनीतिक नीति भारत की ट्रांसपारेंट, बहुपक्षीय नीतियाँ जारी रहेंगी।
  1. निष्कर्ष

2025 में भारत–चीन संबंध एक नए युग में कदम रख रहे हैं—जहां तनाव के बाद अब संवाद, संस्कृति, व्यापार और रणनीति के नए अवसर बन रहे हैं। हालांकि सीमा विवाद, संरचनात्मक असमंजस और शक्ति संतुलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे, लेकिन इस समय का राजनीतिक और आर्थिक रुख उम्मीद के संकेत दे रहा है।

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